मैलवेयर क्या है? और कैसे फैलता है मैलवेयर?

मैलवेयर, जिसे मालिसियस सॉफ़्टवेयर भी कहा जाता है। मालिसियस सॉफ़्टवेयर का एक समूह है जो कंप्यूटर सिस्टम और कंप्यूटर सिस्टम में स्थापित अन्य सॉफ़्टवेयर को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया है

सामान्य मैलवेयर के उदाहरणों में वायरस, वर्म्स, ट्रोजन वायरस, स्पाईवेयर, एडवेयर, रैंसमवेयर आदि शामिल हैं।

मैलवेयर एक फ़ाइल या कोड हो सकता है जिसे एक नेटवर्क के माध्यम से कंप्यूटर सिस्टम तक पहुँचाया जाता है।

कंप्यूटर सिस्टम में मैलवेयर के प्रवेश से उस सिस्टम के प्रदर्शन में गिरावट आती है और साथ ही कंप्यूटर सिस्टम में कई त्रुटि संदेश देखे जा सकते हैं।

मैलवेयर में आमतौर पर साइबर हमलावरों द्वारा विकसित कोड होता है, जिसे कंप्यूटर सिस्टम और डेटा को नुकसान पहुंचाने और नेटवर्क तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

मैलवेयर आमतौर पर ईमेल पर एक लिंक या फ़ाइल के रूप में डिलीवर किया जाता है और जब उपयोगकर्ता उस लिंक पर क्लिक करता है या फ़ाइल खोलता है, तो मैलवेयर उपयोगकर्ता के सिस्टम में प्रवेश करता है।

मैलवेयर कंप्यूटर सिस्टम और उपयोगकर्ता के व्यक्तिगत डेटा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से साइबर अपराधियों द्वारा विकसित मालिसियस सॉफ़्टवेयर है।

मालवेयर का फुल फॉर्म मालिसियस सॉफ़्टवेयर होता है जिसे हिंदी में दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

दुनिया का पहला वायरस क्रीपर था जिसे 1970 के दशक में ARPANET नेटवर्क पर खोजा गया था। इस वायरस को बॉब थॉमस द्वारा विकसित किया गया था और TENEX ऑपरेटिंग सिस्टम के माध्यम से फैलाया था।