ये एक आदत व्यक्ति की मेहनत को कर देती है बर्बाद

जिसका मन स्थिर नहीं वो इंसान कभी खुखी नहीं रह सकता है। कोई कितना ही धनवान क्यों न हो इस एक अवगुण के कारण व्यक्ति का जीवन परेशानियों से घिरा रहता है।

जिस इंसान का दिमाग नियंत्रण में नहीं रहता उसका कामकाज में भी मन नहीं लगता।  चाणक्य ने श्लोक में बताया है कि मन को कंट्रोल न करने वाला व्यक्ति को न तो लोगों के बीच में सुख मिलता है और न ही वन में। 

इसलिए कहते हैं मन के जीते जीत है, मन के हारे हार।

चंचल चित्त वाला व्यक्ति चाहे कितनी मेहनत कर लें, सफलता पाने के लिए उसे संघर्ष करना ही पड़ेगा।  मन के भटकने से व्यक्ति काम के प्रति एकाग्रता नहीं रख पाता।  ऐसे में काम बिगड़ जाते हैं या फिर पूरे नहीं हो पाते। 

चित्त की चंचलता हर स्थिति में दुख ही देती है इसलिए जिसने इस पर नियंत्रण करना सीख लिया वो कुछ भी हासिल कर सकता है। 

जिनका चित्त उनके वश में नहीं रहता वो इंसान तमाम सुख पाने के बाद भी दूसरों की तरक्की से जलता है।  दूसरों की खुशियां इनसे बर्दाश्त नहीं होती। 

मन पर कंट्रोल नहीं होने पर व्यक्ति अकेले में भी दुखी रहता है।  अगर वो खुद को दूसरों से दूर भी रखें तब भी परेशान रहते हैं क्योंकि अकेलापन इन्हें जीने नहीं देता।