मनुष्य जीवन का सबसे कड़वा सच है ये

किसके कुल में दोष नहीं है? रोग के कारण दुख किसे नहीं होता है। दुःख किसे नहीं मिलता है और लंबे समय तक कौन है जो सुखी रह पाता है। 

 इन सबका एक ही निचोड़ है कमी हर जगह, हर व्यक्ति में है और यही एक कड़वी सच्चाई। 

नजर नहीं नजरिया जरूरी - चाणक्य ने इस श्लोक के जरिए व्यक्ति को उस सच्चाई से रूबरू कराने की कोशिश की है जिसे वह जितनी जल्दी समझ ले, तकलीफें उतनी कम होती चली जाएंगी। 

चाणक्य कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं है, रिश्तों में सुखी रहना है तो दूसरों की बुराई करने से बेहतर है उसकी अच्छाईयों पर गौर किया जाए। 

वहीं कार्यस्थल पर अगर सफलता पानी है तो सहयोगी की कमियां गिनाकर उसे नीचा न दिखाएं बल्कि आगे ऐसी कोई गलती न हो इसके लिए तैयार करें और मोटिवेट करें। 

ऐसे लोग होते हैं सफल - चाणक्य कहते हैं कि कमी हर जगह, हर व्यक्ति में होती है लेकिन अगर हम अपना नजरिया सकारात्मक कर लें तो जहर का कड़वा घूंट भी मिठी मिश्री की तरह स्वाद देने लगता है।

चाणक्य उदाहरण से बताते हैं कि बांस एक ही होता है लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे तीर बनाकर किसी दूसरे को घायल करना है या उसी की बांसुरी बनाकर लोगों में मधुर रस घोलना है। 

जो हालात के मद्देनजर अपना काम करता है वह कभी असंतुष्ट नहीं होता और हर काम को बेहतर ढंग से कर पाता है। 

जिससे उसे सफलता मिलती है। अपनी छवि को इस तरह ढाल लो कि अगर कोई आपकी बुराई भी करे तो दूसरा उस पर कभी विश्वास न करे।