इंसान को बुरे वक्त से बचाती हैं चाणक्य की ये तीन बातें

प्रयास जारी रखें - चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति असफल होने पर डर के मारे अपने फैसले बदल देते हैं वह कभी कामयाब नहीं हो सकते।

कड़वा सच है कि सफलता का रास्ता निराशा और असफलताओं से होकर ही गुजरता है। अगर किसी काम में विपल हो गए हैं तो निराश न हों प्रयास जारी रखें।

जब तक सफलता प्राप्त न हो जाए व्यक्ति को रूकना नहीं चाहिए, क्योंकि असफलता का मुख्य कारण कहीं न कहीं हमारे परिश्रम में कमी रह जाना होता है। 

चाणक्य कहते हैं कि असफलता वह मसाला है जो सफलता को स्वादिष्ट बनाता है। कड़ी मेहनत के बाद जो कामयाबी मिलती है, उससे जीवन सार्थक बनता है। 

आलोचनाओं को करें अनसुना - आलोचनाएं मन में नकारात्मक भाव लाती हैं। असफलता मिलने पर आलोचनाओं का दौर शुरू हो जाता है।

लेकिन चाणक्य ने बताया है कि आलोचनाओं को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देना ही बेहतर है।

इन्हें अनसुना कर और  लोगों की परवाह किए बगैर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे क्योंकि सफल होने के बाद जो कल तक आपकी आलोचना करते थे वही व्यक्ति सफल होने पर बधाई देने वालों की पंक्ति में सबसे आगे दिखाई देंगे। 

आत्मचिंतन है सबसे जरूरी - चाणक्य कहते हैं कि जब मेहनत के बाद भी कामयाबी न मिले तो उस पर रोने की बजाय आत्मचिंतन करें कि आखिर कहां कमी रह गई थी।

उन कमियों पर काम कर लिया तो अगली बार सफलता खुद आपका दरवाजा खटखटाएगी। इसके लिए जरूरी है धैर्य और आत्मविश्वास। 

जब बुरा वक्त चल रहा हो तो ये दोनों ही सबसे बड़ी ताकत होती। धैर्य रखेंगे तो कमियों को खूबियों में बदलने समझ रख पाएंगे।