युवाओं की बर्बादी के हैं ये तीन प्रमुख कारण

आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि युवावस्‍था में बर्बादी का सबसे बड़ा कारण आलस बनता है। 

यह न सिर्फ कीमती समय को बर्बाद करता है, बल्कि पूरे जीवन को खत्‍म करने की क्षमता रखता है।

युवाओं के जीवन में आलस का कोई स्थान नहीं होता। युवाओं को अपना जीवन हमेशा अनुशासन के साथ जीना ​चाहिए। ताकि आलस से दूर रह सकें।

चाणक्‍य नीति का मानना है कि युवाओं के लिए नशा अभिशाप होता है।

जिन युवाओं को नशे की लत लग जाती है, वे अपने जीवन में सिर्फ दु:ख-दर्द ही झेलते हैं। नशे के कारण आर्थिक नुकसान होने के साथ शारीरिक व मानसिक नुकसान भी होता है।

नश किसी भी व्‍यक्ति को बर्बाद कर सकता है। नशे के आदी युवा अपने वर्तमान के साथ अपना भविष्य भी खराब कर लेता हैं।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि युवाओं पर सबसे ज्‍यादा प्रभाव उनकी संगत का पड़ता है।

यदि व्यक्ति गलत लोगों से दोस्‍ती कर उनके साथ उठता और बैठता है तो उसमें में भी गलत आदतें आ जाती हैं।

इसलिए युवाओं को किसी से दोस्‍ती करते समय इन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए। गलत लोग लक्ष्य से भटकाने के साथ जीवन को अंधकार की ओर ले जाते हैं।