इन 4 जगहों पर खुलकर खर्च करें पैसा

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लोगों को जहां तक संभव हो सके बीमार व्‍यक्ति की हमेशा मदद करनी चाहिए। इससे एक इंसान को नया जीवन मिल सकता है।

किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा परोकार का कार्य है। इससे मिलने वाला पुण्‍य सफलता व तरक्‍की के नए रास्‍ते खोलता है। ऐसे लोगों से ईश्वर हमेशा प्रसन्न रहते हैं।

चाणक्य नीति कहती है कि गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना बहुत बड़ा पुण्‍य का कार्य होता है। इस कार्य में किया गया धन खर्च गरीब और जरूरतमंदों की दुआओं के साथ खुब फल देता है।

इस नेक काम से जहां समाज में मान सम्‍मान मिलता है, वहीं परलोक में भी इसका फल मिलता है। जरूरतमंदों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

आचार्य चाणक्य के अनुसार सभी को अपनी आय का कुछ हिस्सा सामाजिक कार्यों में खर्च करना चाहिए।

सभी को अस्पताल, स्कूल, धर्मशाला जैसे भवनों के निर्माण व अन्‍य सामाजिक कार्य में अपनी क्षमता के अनुसार अवश्‍य दान करना चाहिए।

इससे ना सिर्फ समाज में प्रतिष्‍ठा बढ़ती है, इससे जिन लोगों को लाभ मिलता है, उसकी भी दुआएं मिलती है।

आचार्य चाणक्य ने धार्मिक कार्यों के लिए दान करने को भी बड़ा पुण्‍य का कार्य माना है।

आचार्य कहते हैं कि लोगों को मंदिर या किसी अन्‍य पवित्र स्थल को दान देने से पीछे नहीं हटना चाहिए। इस दान से पुण्य मिलने के साथ जीवन में भी सकारात्मकता आती है।