कठिन समय में इस एक चीज का कभी न छोड़े साथ 

कठिन समय में विपत्ति को अवसर में मोड़ें और अपने लक्ष्य को कभी न छोड़ें

चाणक्य के अनुसार जब व्यक्ति लगातार नाकाम होता है तो उस कठिन समय में विपत्ति को ही अवसर में बदलना चाहिए। इसके लिए जरुरी है खुद से संवाद। 

लक्ष्य से भटकें नहीं - लक्ष्य प्राप्ति की राह आसान नहीं होती। ये गुलाब के फूल के समान है जिसकी डगर कांटों से भरी होती है लेकिन मंजिल बहुत खूबसूरत होती है।

चाणक्य कहते हैं कि जो मुश्किल दौर में भी अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ते, धैर्य और ईमानदारी से अपना कार्य करते रहते हैं वह जरुर कामयाब होते है। असफल होने का डर ही व्यक्ति को संकट में डालता है। 

अगर नाकामयाबी को इंसान सही तरीके से ले तो वह दो दिशाओं में आगे बढ़ता है. एक तो वह अपने काम को बेहतर करता है और दूसरे, इंसान के तौर पर भी श्रेष्ठ बनता है। 

अगर अपने भ्रम को समझ लिया तो जीवन में स्पष्टता आएगी जो लक्ष्य प्राप्ति के लिए बेहद जरुरी है। 

लक्ष्य साध लिया तो कभी बुरे दिन जल्द टल जाएंगे और जीवन खुशियों से भर जाएगा। 

परिश्रम से पास होगी परीक्षा - परिश्रम करते रहना चाहिए कितना ही खराब समय आ जाए व्यक्ति को बैठे नहीं रहना चाहिए। 

लगातार परिश्रम करते रहना चाहिए। परिश्रम ही व्यक्ति को इस संकट से निकलने में मददगार होता है।