इस हालात में ज्ञान भी हो सकता                    है घातक

चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति जो ज्ञान अर्जित करता है अगर उसका अभ्यास न करें तो वो बेकार हो जाता है। 

चाणक्य के मुताबिक अधूरा ज्ञान बहुत खतरनाक होता है, इसलिए प्रैक्टिस कर उसे पूर्ण रूप से ग्रहण करना चाहिए। 

उदाहरण के तौर पर अगर डॉक्टर अधूरे ज्ञान के आधार पर मरीजों का इलाज करे तो कितना नुकसानदायक हो सकता है। 

विद्या का अर्जन करने के बाद उसकी प्रैक्टिस जरूर करें तभी सफलता मिलेगी। 

चाणक्य के अनुसार अपच की स्थिति में व्यक्ति को हल्का भोजन या फिर खाना नहीं ग्रहण करना चाहिए। 

इससे पेट से संबंधित समस्या और बढ़ सकती है। इस अवस्था में भोजन जहर के समान बताया गया है। जो व्यक्ति को तकलीफ पहुंचाता है। 

आचार्य चाणक्य ने बताया है कि एक स्वाभिमानी गरीब व्यक्ति के लिए समारोह, शादी, उत्सव सब बेकार होते हैं। 

क्योंकि ऐसी जगह उसकी आर्थिक परिस्थिति का मजाक उड़ाया जाता है। जिसे वो सहन नहीं कर पाता, और ऐसे मजाक उसके लिए जहर के समान हो जाते हैं।