इन हालातों में व्यक्ति को विष भी पी लेना चाहिए

चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने लोगों को सफलता हासिल करने के गुण बताए हैं।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक है। आचार्य चाणक्य को एक महान शिक्षाविद, कूटनीतिज्ञ व राजनीतिज्ञ माना गया है।

चाणक्य ने एक श्लोक में बताया है कि किस परिस्थिति में व्यक्ति को विष ग्रहण कर लेना चाहिए।

चाणक्य कहते हैं कि अगर विष में अगर अमृत हो तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए।

अपवित्र और अशुद्ध वस्तुओं में भी अगर सोना अथवा मूल्यवान वस्तु पड़ी हो तो वह भी उठा लेने के योग्य होती है।

इसी प्रकार दुष्ट कुल में जन्मे अच्छे गुणों से युक्त स्त्री रूपी रत्न को ग्रहण कर लेना चाहिए।

अगर किसी नीच व्यक्ति के पास कोई उत्तम गुण अथवा विद्या है तो वह विद्या उससे सीख लेना चाहिए। 

यानी व्यक्ति को सदैव इस बात का प्रयास करना चाहिए कि जहां से उसे किसी अच्छी वस्तु की प्राप्ति हो, अच्छे गुणों और कला को सीखने का अवसर प्राप्त हो तो उसे हाथ से जाने नहीं देना चाहिए।

विष में अमृत और गंदगी में सोने से तात्पर्य नीच के पास गुण से है।