पिता, पुत्र, मित्र और जीवनसाथी के साथ कैसे होने चाहिए रिश्ते

पुत्र करें पिता की आज्ञा का पालन - चाणक्य नीति के अनुसार एक अच्छा पुत्र वही है जो अपने पिता का भक्त हो और उनके आज्ञा का पालन करता हो।

जो पुत्र पिता की आज्ञा का पालन करता है और उनके कहे अनुसार चलता है सही मायने में वही पुत्र है। 

पिता का भी कर्तव्य है कि वह अपने बच्चे का सही प्रकार से पालन करें और उसकी जरूरतों का ध्यान रखें। 

जीवनसाथी के सुख का रखें ध्यान - चाणक्य नीति के अनुसार जीवनसाथी के सुख व दुख का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण कर्तव्य माना जाता है।

यहां सुख से मतलब केवल शारीरिक सुख नहीं है, बल्कि इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपका जीवनसाथी जिस ​चीज से खुश हो वही करें। 

हर परिस्थिति में अपने पार्टनर का साथ निभाएं। उसके सुख में ही नहीं, बल्कि दुख में साथ खड़े रहें ताकि दुख की स्थिति को भी आसानी से पार किया जा सके। 

जिस पर विश्वास कर सके वही है मित्र - आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में मित्र की परिभाषा देते हुए बताया है कि असली मित्र वही होता है जिस पर आप भरोसा कर सकें। 

मित्र के साथ व्यक्ति अपने सुख और दुख बेझिझक शेयर कर सकता है। इसलिए उसका भरोसेमंद होना जरूरी है। 

साथ ही आप भी अपने मित्र का भरोसा हमेशा बनाए रखें ताकि वह आपके साथ अपनी बातें शेयर कर सके।