एक श्रेष्ठ व्यक्ति को किस तरह मिलता है संगति का लाभ

वर्तमान समय में भी चाणक्य नीति का पाठन व श्रवण कई युवाओं द्वारा किया जाता है।

चाणक्य नीति के भाग में आइए जानते हैं कि अच्छी संगति में रहने वाले व्यक्ति पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

दर्शनध्यानसंस्पर्शैर्मत्स्यी कूर्मी च पक्षिणि । शिशु पालयते नित्यं तथा सज्जनसंगतिः ।।

जिस तरह एक मछली, मादा, कछुआ और पक्षियां अपने नवजात शिशु का लालन-पालन, ध्यान से तथा स्पर्श से करती हैं। ठीक उसी तरह सत्संगति भी हर परिस्थिति में मनुष्य का पालन करती है।

चाणक्य नीति के इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि जिस तरह एक नवजात शिशु का पालन मां बड़े ध्यान से करती हैं ठीक उसी तरह समाज व सुसंगति भी एक श्रेष्ठ व्यक्ति को हर परिस्थिति में सही मार्ग दिखाती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि सुसंगति में रहने वाला व्यक्ति कैसी भी विषम परिस्थिति में गलत मार्ग पर नहीं जाता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा अच्छी संगत में रहना चाहिए।

यह न केवल सफल व्यक्ति की पहचान होती है, बल्कि ऐसा करने से व्यक्ति सभी नकारात्मकताओं से दूर रहता है।

इसके साथ बुरी संगति में रहने वाला व्यक्ति हर समय तनाव और नकारात्मकता से घिरा हुआ रहता है और संगति के प्रभाव में वह गलत कर्मों में भी लिप्त हो जाता है।

इससे न केवल उसके जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि इससे उसके परिवार व कुल का नाम नीचे हो जाता है।