इन तीन चीजों के कारण रिश्तों में आती हैं दूरियां

चाणक्य कहते हैं रिश्ते नाजुक डोर जैसे होते हैं इनमें अगर वहम आ जाए तो ये कच्ची डोर टूट जाती है। 

वहम का कोई इलाज नहीं. रिश्तों में वहम और अहम का कोई स्थान नहीं।  वहम की जद में इंसान सीधी बात का भी उल्टा मतलब निकालता है। 

अगर कोई उसे समझाए तो भी वो उसे भी गलत समझ बैठता है। खुद के सदा सही होने का वहम अच्छे खासे रिश्तों में दरार डाल देता है। 

जिद से रिश्ते हमेशा खराब होते हैं. चाणक्य के अनुसार दिमाग को संतुलित करने का सलीका जिसे नहीं आता वो जिद पर उतर आता है। जिद रिश्तों पर नकारात्मक असर डालती है। 

 गलत चीजों की जिद से व्यक्ति खुद का और अपने आसपास मौजूद लोगों का भी नुकसान करता है।  जिसकी वजह से आपके अपने नाता तोड़ लेते हैं, क्योंकि जिद्दी स्वभाव कोई सहन करना पसंद नहीं करता। 

जब रिश्तों में जिद और बातों में मुकाबला करने की होड़ आ जा तो ये दोनों जीत जाते है और रिश्ता हार जाता है। 

 ऐसे समय में व्यक्ति बड़े -छोटों का अंतर भूल जाता है, क्योंकि अगर कोई आपका अपना कुछ बात कह रहा है तो पलटकर व्यक्ति उसे ऐसा जवाब देने की कोशिश करता है जिससे बातों में तो वो जीत सकता है। 

लेकिन रिश्तों पर ये भारी पड़ जाता है।  असंयमित भाषा खून के रिश्तों को भी खत्म कर देती है।