जवानी में इन चीजों से बना ली दूरी फिर खुशी-खुशी कटेगा बुढ़ापा

गलत संगत - संगत का असर हर इंसान पर होता है, फिर चाहे वो अच्छी हो या बुरी। बुरे कर्म करने वाले लोगों की संगत गलत काम करने के लिए प्रभावित करती है।

कामवासना, लड़ाई-झगड़ा, नशा आदि चीजें व्यक्ति की लक्ष्य प्राप्ति में बाधा हैं। इनकी आदत पड़ जाए तो व्यक्ति सोचने-समझने की शक्ति खो बैठता है और सफलता उससे दूर चली जाती है। 

चाणक्य के अनुसार, बुरी संगत का नतीजा बुरा ही होता है ,युवावस्था में व्यक्ति अपना भला-बुरा खुद समझने की क्षमता रखता है लेकिन अगर वह इन चीजों में लिप्त है तो फौरन इनसे दूर हो जाए। 

चाणक्य कहते हैं जो जवानी में इन चीजों से कोसों दूर रहता है उसका बुढ़ापा भी खुशी-खुशी गुजरता है। 

आलस्य - कहते हैं कि जवानी में अगर परिश्रम कर लिया तो बुढ़ापा संवर जाएगा।

यही वो उम्र होती है जहां आलस्य रूपी दुश्मन व्यक्ति को तरक्की करने से रोकता है, जिसने इस पर काबू पा लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। 

जवानी में जो समय का मूल्य समझ लेता है उसका भविष्य कभी दुख में नहीं कटता। 

आलसी व्यक्ति को विद्या नहीं मिल पाती है और विद्या के बिना धन नहीं मिलता। धन के बिना जीवन संघर्ष में ही गुजरता है। 

गुस्सा - क्रोध से काम बनते नहीं, बिगड़ते हैं।

चाणक्य कहते हैं कि जवानी में खून खौलना आमबात है लेकिन जिसने इस पर काबू पा लिया उसके लिए उन्नति की राह सुलभ हो जाती है। 

गुस्सा बुद्धि भ्रष्ट कर देती है। यह ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे व्यक्ति को खोखला कर देता है। 

अगर यह साथ है तो अपने क्या, पराए भी दूरी बना लेते हैं और दुश्मन इसका फायदा उठाकर आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देता है।