शरीर के इस अंग पर पा लिया काबू फिर कोई नहीं रोक सकता

स्त्री हो या फिर पुरुष हर कोई कामयाबी पाना चाहता है। जिसके लिए मेहनत के साथ साथ भाग्य का साथ होना भी जरूरी है। 

लेकिन इन सबके बीच अगर शरीर के इस अंग पर स्त्री या पुरुष काबू कर लें तो फिर कोई उन्हे रोक नहीं पाएगा। 

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी स्त्री या पुरुष के लिए सफलता की कुंजी उसकी वाणी है। 

चाणक्य ने बताया है कि बोलने से पहले 100 बार सोचना चाहिए। क्योंकि बोली हुई बात वापस नहीं ली जा सकती, शब्दों का वार तलवार के वार से भी ज्यादा खतरनाक होता है। 

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर एक आर्थिक रुप से सम्पन्न स्त्री-पुरुष की भाषा कड़वी है तो उससे बड़ा गरीब दुनिया में दूसरा नहीं हो सकता है। 

वहीं अगर किसी गरीब की बोली शहद के समान मीठी है, तो वो गरीब होने के बाद भी पूजनीय है। 

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि स्त्री-पुरुष को बोलते हुए थोड़ी कंजूसी करनी चाहिए। जितना जरूरी हो उतना ही बोलें। 

बेकार की बातें कराना या फिर हर बात पर बोलना ज्ञानी नहीं मूर्ख होने की निशानी है। 

आचार्य चाणक्य बताते हैं कि कोई भी समझदार स्त्री पुरुष बोलने से पहले सोचते हैं, चाहें वो घर पर हों या फिर ऑफिस में। क्योंकि एक गलत शब्द उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। 

शरीर के इस अंग यानि की जीभ पर काबू करने वाले हमेशा मान सम्मान के अधिकारी होते हैं और अपने क्षेत्र में नाम भी कमाते हैं।