बुद्धिमान व्यक्ति को इन परिस्थितियों में झेलना पड़ता है कष्ट 

एक श्लोक में आचार्य बताते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति को किन परिस्थितियों में कष्टों का सामना करना पड़ता है। आप भी जानें क्या कहती है आज की चाणक्य नीति-

इस श्लोक का अर्थ है कि मूर्ख शिष्य को उपदेश देने, दुष्ट स्त्री का पालन-पोषण करने, धन नष्ट होने और दुख व्यक्ति के साथ व्यवहार रखने से बुद्धिमान व्यक्ति को कष्टों का सामना करना पड़ता है।

चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान देने का कोई लाभ नहीं होता है। इससे केवल सज्जन और बुद्धिमान लोग हानि उठाते हैं।

उदाहरण के लिए बया और बंदर की कहानी आपको याद होगी। मूर्ख बंदर को घर बनाने की सलाह देकर बया को अपने घोंसले से हाथ धोना पड़ता है।

इसी प्रकार दुष्ट और कुलटा स्त्री का पालन-पोषण करने से सज्जन और बुद्धिमान व्यक्तियों को दुख ही प्राप्त होता है।

चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अनेक रोगों से पीड़ित हैं और जिनका धन नष्ट हो चुका है, ऐसे व्यक्तियों से किसी प्रकार का संबंध रखना बुद्धिमान लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है।

अनेक रोगों से पीड़ित का तात्पर्य संक्रामक रोग से है। बहुत से लोग संक्रामक रोगों से ग्रस्त होते हैं, उनकी संगति से स्वयं को रोगी का अंदेशा रहता है।

जिन लोगों का धन नष्ट हो चुका है या दिवालिया हो चुके हैं, उन पर विश्वास करना मुश्किल होता है।

ऐसे लोगों का दुख से उबरना मुश्किल होता है। जो लोग वास्तव में दुखी हैं और उबरना चाहते हैं उसका सहयोग करना चाहिए। क्योंकि दुखी से तो स्वार्थी ही बचता है।